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See Guruji giving blessings in the end

The prashna & answers are taken from Dharamdoot.




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Wednesday, January 1, 2014

तुम्हारे जैसा-




तुम परमात्मा के हस्ताक्षर होतुम्हारे जैसा परमात्मा ने कोई नहीं बनाया। अपने पर मान करोअपने होने का आनन्द लो।

परम पूज्य सुधांशुजी महाराज

You are God's signature. God has not made anyone like you. Be proud of this fact and feel blessed. 



Wednesday, December 25, 2013

ऐसा करने से



---------- Forwarded message ----------
From: Madan Gopal Garga LM VJM <mggarga@gmail.com>
Date: 2013/3/27
Subject: [AMRIT VANI ] ऐसा करने से
To: mggarga@gmail.com





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Madan Gopal Garga LM VJM द्वारा AMRIT VANI के लिए 3/27/2013 09:52:00 am को पोस्ट किया गया

Wednesday, September 11, 2013

प्रशन :-जीवन के लिए सब से महत्त्वपूर्ण कया हे


प्रशन :-जीवन के लिए सब से महत्त्वपूर्ण  कया हे 
पूज्य गुरुदेव :-
मनुष्य के गुण उसके जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं ! संपत्ति तो संसार मैं ही रह जायेगी यहीं कमाई जाती है , लेकिन गुण तो जन्म जन्मानतर तक काम आयेंगे !आपका स्वच्छ अंतर्मन , निर्मल स्वभाव इस दुनिया मैं भी आपको सुखी करेगा और अगली दुनिया मैं भी सुखी करेगा !सजी हुई आत्मा आपको उच्च  सिंहासन पर बैठाएगी !आपका निर्मल ह्रदय परम प्रभु का आसन बनेगा ! आपके मन में उठती हुई भावनये आपको अपने प्रभु का चिंतन करने के लिए तत्पर करेगी ! इसलिए दुनिया की कोई भी दौलत इतनी महत्वपूर्ण नहीं है जितने गुण !

Thursday, September 5, 2013

जिज्ञासु -जो हमारी आशा ,उत्साह और उन्नति के पथ पर बढते हुए कदमों को रोक देती है

प्रश्न आपके उत्तर गुरुदेवके 

जिज्ञासु ………:पूज्य गुरुदेव !वह कौन सी चीज है जो हमारी आशा ,उत्साह और उन्नति के पथ पर बढते हुए कदमों को रोक देती है !

महाराजश्री ……।:जीवन मैं आशा उत्साह के साथ उन्नति की और बढते कदमों को रोकने का सबसे पहला काम निराशा के विचार करते हैं !निराशा आपकी प्रगति को उसी तरह बिगाड के रख देते है जैसे दूध से भरे बर्तन मैं डाली गई नीबू की कुछ बून्दें कुछ ही बून्दे काफी हैं दूध के अन्दर जाने के लिए और फिर वे दूध की पूरी शक्ल ही बदल देंगी ! थोडे से भी निराशा के विचार आपके अन्दर आ जाएं तो आपकी स्थिति बदल सकती है ,आप अपनी शक्ति खो बैठेंगे !आपके शरीर मैं सभी तरह का बल है किंतु  आपको लगेगा कि आपका बल न जाने कहां चला गया ! निराशा के थोडे से विचार आपका सौन्दर्य आपका लावण्य सब कुछ छीन सकते हैं! इसलिए निराशा से बचें !,आशा -उत्साह अपनाएंऔर आगे बढ़ें  !संतोष  ,धैर्य और विवेक से काम लेने पर मनुष्य के जीवन मैं सुख और शांति उतरती है !प्राणी मात्र के प्रति जिस व्यक्ति के हृदय मैं वैरभाव नही , जिसका चित्त वैर से जलता नहीं !वह भग्वान का प्रिय है !

Wednesday, June 12, 2013

मुझे क्रोध बहुत आता हे

मुझे क्रोध बहुत आता हे


प्रश्न :-मुझे क्रोध बहुत आता हे !क्रोध की स्थिति में कुछ भी कर डालता हूँ जो कई बार बहुत हानिकारक भी होता है ! में क्या करूँ कैसे अपने क्रोध को रोकूँ? 
गुरूदेव :-आप पहले तो एकांत में बैठकर यह विचार करें कि आपको क्रोध आता ही क्यों है !सामान्यत: व्यक्ति जो सोचता है वह नहीं हो पाए ,स्वार्थ सिद्धि  में बाधा आए , अथवा परिस्थितियाँ प्रतिकूल हो जाए तो क्रोध आता है ! हानि  से बचने के लिए आवश्यक यह है कि जब भी क्रोध आए , लम्बी गहरी श्वास लें और क्रोध के विषय से स्वंय को दूर ले जाए और प्रतिकार को २४ घंटे के लिए टाल दें !मन में अपने गुरु का ध्यान और मन्त्र जाप शुरू कर दें !बाद में एकांत में विचार करें इस स्थिति के लिए में कहाँ तक दोषी हूँ !