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See Guruji giving blessings in the end

The prashna & answers are taken from Dharamdoot.




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Thursday, December 30, 2010

कृपया यह बताए कि व्यवस्थित होने का उपाय क्या हे ?


जिज्ञासू :- गुरुदेव ! आप अपने प्रवचनों में व्यवस्थित होने के लिए बहुत बल देते हें ! कृपया यह बताए कि व्यवस्थित होने का उपाय क्या हे ?

गुरुदेव :-
घर में व्यवस्था कब होती हे , जब मन में व्यवस्था होती हे ! मन में व्यवस्थिता कब होती हे , जब मन शांत हो और मन में शान्ति कब होती हे जब ईश्वर के साथ आपका मन जुडा हुआ हे ! दुनिया से जुडे रहोगे तो अशांत रहोगे ! शांत रहोगे तो व्यवस्थित रहिगे ! व्यवस्थित रहोगे तो नियमित भी रहोगे और आप नियमित है , तो फिर योजनाबद्ध तरीके से चलोगे , 'प्लानिंग"करके चलोगे ! जब प्लानिंग करक्र चलोगे तो आपके दिल में शांति रहेगी ! पता चला कि सबके पीछे एक ही बीज काम करेगा कि शांत होकर दो घड़ी अपने भगवान की आराधना में बैठते हुये , अपने मन को सतुलित करने की और व्यवस्थित करने की कोशिश करें !

Tuesday, December 28, 2010

Fw: [DOHE AND CHOPAI Param Pujay SUDHANSHUJI Maharaj ke pravachano se liye] 12/28...

----- Original Message -----
Sent: Tuesday, December 28, 2010 2:53 PM
Subject: [DOHE AND CHOPAI Param Pujay SUDHANSHUJI Maharaj ke pravachano se liye] 12/28...

दया धर्म का मूल हे ,पाप मूल अभिमान ,
तुलसी दया न छोडिए , जब लग घाट में प्राण !


जब में था हरी नहीं ,हरी हें में नहीं ,
प्रेम गली अति सांकरी, जा में दो न समाए!

--
Posted By Madan Gopal Garga to DOHE AND CHOPAI Param Pujay SUDHANSHUJI Maharaj ke pravachano se liye at 12/28/2010 02:53:00 PM

गुरुदेव ! आनन्द पाने का मार्ग क्या हे ?




जिज्ञासू :-
गुरुदेव ! आनन्द पाने का मार्ग क्या हे ? आनन्द सभी पाना चाहते हें लेकिन वो क्या स्थितियां हें जिनके कारण दुख होता हे !

गुरुदेव :- अपने से जुड जाना आनन्द पाना हे ! दूसरे शब्दों में समझिये कि जिस समय हम संसार मे , में ,
मेरा ,कहीं मोह ,कहीं मया , कहीं ममता , कहीं अहकार से जो अज्ञान बना रहता हे , उससे बन्धन आता हे और फिर कहीं न कहीं समस्यायें आती हें ! किसी को नीचा दिखाने की कामना , किसी को पास बुलाने की इच्छा , किसी को अपने वर्ग में जोड़ने की इच्छा ,किसी के साथ में बदला लेने की भावना ,किसी के व्यवहार के कारण निराश हो जाना ,यही चीजें हें , जो हमें दु:खी करती हें !

Monday, December 27, 2010

जिज्ञासू :- गुरुदेव कहा जाता है कि स्वंय को पहचानो


जिज्ञासू :- गुरुदेव कहा जाता है कि स्वंय को पहचानो ! क्या यह संभव है कि स्वंय को पहचाना जा सके ?
गुरुदेव :- अदभुत शक्तियां हें इन्सान के पास में ! इन्सान एक पाँव से रस्सी पर चलता हे ,इन्सान हवा में उडता हे ! इन्सान कि शक्तियां हें कि वह पहाडों की उंचाइयों को नापता हे ! इन्सान ने सागर की गहराइयों को नापा , इन्सान ने आकाश की बुलन्दियों को छुआ ! इन्सान ये सब कुछ कर सकता हे तो क्या अपने स्वरूप को नहीं पहचान सकता ! अवश्य पहचान सकता हे !

Sunday, December 26, 2010

वर्तमान को संभालो





प्रश्न आपके ,समाधान सदगुरुदेव के

जिज्ञासु : गुरुदेव ! मेरे पिताजी मुझसे बार बार यही कहते हें कि " आने वाले कल के बारे में सोचो , भविष्य को संभालो ,कल क्या होगा इस बारे में सोचो ! मैनें आपसे सुना कि वर्तमान में जीओ ,वर्तमान को संभालो ! में क्या करुं ? कृपया मार्गदर्शन कीजिए !
महाराज्श्री : जो चल रहा हे उसे ठीक कर लो ! आने वाला कल ठीक हो जायेगा ! अगर इसी को ठीक नहीं कर पा रहे हो तो आने वाला भविष्य भी खराब होगा ,क्योंकि ये सभी उसी पर टिका हुआ हे ! जो क्षण चल रहा हे ,इसमें दो चीजें हें ,भूतकाल हमारा एक क्षण जिसमें हम सांस ले रहे हें , ये भूत होता जा रहा हे ,पास्ट होता जा रहा हे ! जो भविष्य था वह सरक कर वर्तमान होता जा रहा हे ,तो तब एक क्षण थोडी देर के बाद भूतकाल बन जाता हे और थोडि देर पहले वह भविष्यकाल था ! बस इस तरह से समय चल रहा होता हे ,न भूत कुछ हे ,न भविष्य कुछ हे ! जो कुछ हे यह वर्तमान ही हे ! जिस में आप जी रहे हें ! ईसे अच्छा बनये 1 योजना बना कर चलना अच्छी बात हे ! इन योजनाओं के नाम पर चिन्तायें इकटठी कर लेना ये अच्छी बात नहीं हे !

Friday, December 17, 2010

Fw: [GURUVAR SUDHANSHUJI MAHARAJ] भगवान का नियम

----- Original Message ----- To: mggarga@gmail.com
Sent: Friday, December 17, 2010 3:36 PM
Subject: [GURUVAR SUDHANSHUJI MAHARAJ] भगवान का नियम




भगवान का नियम भगवान से भी ऊपर ही ,भगवान् अपने नियम कभी नहीं तोड़ते ! भगवान से उनका नियम बदलने के लिए कभी प्रारथना मत करो ,उनके नियमो का पालन करो !

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Madan Gopal Garga द्वारा GURUVAR SUDHANSHUJI MAHARAJ के लिए 12/17/2010 03:36:00 PM को पोस्ट किया गया

Wednesday, October 13, 2010

Fw: [DELHI (VISHWAJAGRITI MISSION )] शान्ति एव सौहार्द की प्रतिमूर्ति हैं सदगुरु

----- Original Message ----- To: mggarga@gmail.com
Sent: Wednesday, October 13, 2010 7:17 PM
Subject: [DELHI (VISHWAJAGRITI MISSION )] शान्ति एव सौहार्द की प्रतिमूर्ति हैं सदगुरु


शान्ति एव सौहार्द की प्रतिमूर्ति हैं सदगुरु
समाचार चैनलोंका आज भारी बोलबाला है , ऐसा लगता है कि किसी की भी पगड़ी उछालने का उनके पास अधिकार है ! कुछ निहित स्वार्थी लोग उनको ऐसी सामग्री देकर आग में घृत डालने का कार्य करते हैं !कुछ संतोंपर तथा ज्योतिषी और तांत्रिकों पर दिखाया गया स्टिंग औपरेशन उसका ताजा उदाहरण है ! परम पूज्य सुधांशुजी महाराज को भी इसी चैनल ने इसी नाप से नापने की कोशिश की ,जिसकी सम्पूर्ण राष्टृ ने निन्दाजनक अभिव्यक्ति दी है !
सदगुरुदेव सदा शांति एवं सौहार्द का ही संदेश देते हें ,उनका आदेश है -केवल शांत रहकर सबके लिए सदबुद्धि की मंगल प्रार्थना करें ,कोई भी आवेशित होकर व्यवहार न करें !
ऐसे प्यारे सदगुरुजी महाराज को किसी से क्या स्वार्थ !
मीडिया भेष बदलकर ललचाने ,फंसाने आया, गुरु के मुख से कुछ मनचाहा निकलवाने की कोशिश करता रहा ,परन्तु सदगुरुजी ने मुख से कुछ नहीं कहा जो आपत्तिजनक हो ! परन्तु चैनल ने शब्धों को अपने अर्थ निकालने के उद्देश्य से उनका उपयोग किया !
महाराजश्री स्वय पक्ष रखने के लिए चैनल की स्क्रीन पर दिखाई दिए ,उन्होंने अपनी बात स्पष्टता से कही!
एक वार्ताकार के कुछ शब्द स्तर से परे थे ,जो दुखदाई थे ! संतों को गलत साबित करने की ऐक मुहिम आज चरम पर हे ! जिंसका एक कारण यह भी है ,कुछ तथाकथित नकली लोग धर्म ध्वज धार्ण किए हुए हैं, लेकिन अच्छे और बुरे लोग हर युग में रहे हैं ! सुगन्ध के प्रसार्ण से ही वातावरण महकेगा दुर्गन्ध से नहीं !
डाँ नरेन्द्र मदान

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Madan Gopal Garga द्वारा DELHI (VISHWAJAGRITI MISSION ) के लिए 10/13/2010 07:17:00 PM को पोस्ट किया गया

Tuesday, October 12, 2010

Guruji aagami programes











Subject: Guruji aagami programes




October 8-10 Jaipur Rajasthan
October 20-24 Ganesh Laxmi Yagya A D Ashram Delhi
22 october 2010 purnima darshan
27 to 31 october 2010, Ludhiana,Punjab
17 to 21 november 2010,Bhopal,Madhya Pradesh Purnima darshan
1 to 5 december 2010 ,Chandigarh,haryana
10 to 12 December 2010,Mumbai, Maharashtra.
24 to 26 December ,2010, kolcatta,west Bengal
6 to 9 January,2011 , Nagpur Maharashtra.
21 to 23 Januart 2011, Haiderabad,Andhra Pradesh.
28 to 30 Jan.2011 ,Surat Gujrat.









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Madan Gopal Garga द्वारा GURUVAR SUDHANSHUJI MAHARAJ के लिए 9/04/2010 12:47:00 PM को पोस्ट किया गया

Monday, October 11, 2010

पूज्य श्री सुधांशुजी महाराज का विनम्र निवेदन



पूज्य श्री सुधांशुजी महाराज का विनम्र निवेदन
मुझे जो आज तक न्यूज चैनल से कहना था उनके समक्ष कह दिया था ! इस चर्चा को अधिक विस्तार न दिया जाए ! सत्य के लिए आग्रह होना चाहिए परन्तु आवेश नहीं ! हमने अपनी बात वरिष्ठ पत्रकारों के सम्मुखरख दी वे अपना उत्तरदायित्व समझते हें ! सम्भवत:ये ध्यान रखा ही जाएगा कि सबको एक तराजु में न तोला जए ! भक्तों से आग्रह है शांत रहकर सर्वमगल प्रार्थना करें और विवेक न खोएं1

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Madan Gopal Garga द्वारा GURUVAR SUDHANSHUJI MAHARAJ के लिए 10/11/2010 05:08:00 PM को पोस्ट किया गया

Saturday, September 25, 2010

Guruvar ka Jaipore progmm



Sent: Saturday, September 18, 2010 11:53 AM
Subject: Guruvar ka Jaipore progmm.
Guruvar will come atJaipur On 8th oct 10. Parvachan will be from 8th oct to 10thoct 10.
Time-
Date Morning Evening
8.10.2010 --------- 5.30 to 8.00
9.10.2010 8.30 to 11.00 5.30 to 8.00
10.10.2010 8.30 to 11.00 5.30 to 8.00
Venue- JAI UDHYAN OPP. GOVINDDEVJI MANDIR JAIPUR




हर किसी में अच्छाई को ढूंढो




दूसरों के दोष ढूंढने में अपनी शक्ति का अपव्यय मत करो। अपने आप को ऊँचा उठाने का हर सम्भव
प्रयास जारी रखो, उसे कम न होने दो।
हर किसी में अच्छाई को ढूंढो, उससे कुछ सीखकर अपना ज्ञान और अनुभव बढाओ। इससे तुम बहुत
जलदी ऊँचाई तक पहुँच सकते हो।

परम पूज्य सु्धांशुजी महाराज
Do not waste your energy in finding faults in others. Instead, make every possible effort to stand out or shine yourself.

Find excellence in everybody. Using the knowlege you gain from this mindset, you can reach great heights in a short amount of time
.



Translated by Humble Devotee
Praveen Verma



अन्तःकरण स्वच्छ होना चाहिए


Sent: Thursday, August 26, 2010 7:42 PM
Subject: अमृत वचन


आदमी का अन्तःकरण स्वच्छ होना चाहिए । यदि हम खुद अच्छे हैं तो दुनिया अच्छी है। यदि हम बुरे हैं तो दुनिया हमारे लिए बुरी ही साबित होगी। दूसरों की अच्छाई तो देखो पर बुराई न देखो, वरना दुनिया हमारे लिए बुरी ही होगी।

परम पूज्य सु्धांशुजी महाराज
A person's conscious should be clear and clean. If we are good then the world is good. And if we are bad then the world will prove to be bad for us. Be good and see goodness in others, this will ensure a good world for all.
Translated by Humble Devotee
Praveen Verma

जीवन की सम्पूर्णता है आनन्द



Sent: Thursday, September 02, 2010 10:40 PM
Subject: अमृत वचन


जीवन की सम्पूर्णता है आनन्द और आनन्द परमात्मा का ही एक रूप या एक नाम है जिसे सच्चिदानन्द कहा जाता है। हमारा जन्म परमात्मा से मिलने के लिए ही हुआ है और इसी उद्देश्य को लेकर हम दुनियाँ में आए हैं । वस्तुतः जीवन एक अवसर है परमात्मा से मिलने के लिए।


परम पूज्य सु्धांशुजी महाराज

Life's completeness is bliss and bliss is one of the God's name and form which is called "existence-consciousness-bliss" . The purpose or goal of our birth is to unite with God. To fulfill this goal, we must lead a complete life and ulitize our opportunity to unite with God.


Translated by Humble devotee
Praveen Verma


जीवन संगीत है।



Sent: Thursday, September 23, 2010 6:39 AM
Subject: अमृत वचन


जीवन संगीत है। सुर से बजाओगे तो बहुत अच्छा है, मधुर है और अगर सुर से भूल गए तो शोर है जीवन
और उसको खुद भी नहीं सुन पाओगे दूसरे तो क्या सुनेगें ।

जीवन है चुनौती । नित नई नई चुनौती बनकर सामने आती हैं । जब आप बहादुर होकर चुनौती को स्वीकार करते हैं
तो वो कुछ न कुछ देकर ही जाएँगी, कुछ लाभ देंगी ।

परम पूज्य सु्धांशुजी महाराज


Life is filled with music. When the music is in tune, life is melodious and sweet. However, when the music is out of tune it just becomes noise. No one will be able to listen, not even you.
Life is a challenge. Everyday we face new challenges. When we face a challenge with courage, we benefit from the rewards we reap.
Translated by Humble Devotee
Praveen Verma


Saturday, June 26, 2010

तेरा जलवा जहाँ होगा।

----- Original Message -----
To: mggarga@gmail.com
Sent: Monday, June 21, 2010 8:22 AM
Subject: [GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL-Good thoughts by SUDHANSHUJI Maharaj] 6/21/2010 0...


हर भक्त की पुकार अपने सद्गुरुजी के लिए एक ही होती है और वह है।
तेरा जलवा जहाँ होगा।
मेरा सजदा वह होगा।
मेरे जैसे तो लाखो होंगे।
पर तेरे जैसा प्यारा कहाँ होगा।
गुरुवर सुधांशुजी महाराज के प्रवचनांश

--
Niranjan Manju Agarwal द्वारा GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL-Good thoughts by SUDHANSHUJI Maharaj के लिए 6/21/2010 08:15:00 AM को पोस्ट किया गया

Saturday, May 15, 2010

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Friday, April 2, 2010

Manali Sadhna shiver







Yoga & Meditation SHIVER


FIVE DAY YOGA AND MEDITATION SHIVERS
4th Jun To 7th June &9th June To 12th jun
Contribution
Rupees Eleven Thousand
Only, Highly subsidized
. LIFE TIME OPPORTUNITY TO HAVE A SPIRITUAL RETREAT IN AUGUST COMPANY OF HIS HOLINESS MAHARAJ JI AT MANALI
The world is getting smaller and so are our families. We've got faster cars, faster computers, more telephone connections, more email ID's and still less time to spend with each other.

When was the last time you took a break, left your office behind, let your kids forget about school, packed your bags and just decided to spend some "quality time" .
Manali literally means the 'Home of Manu', the mythological character that survived when the world was drowned in a flood. Spectacular views of snowcapped peaks and wooded slopes, grassy meadows carpeted with wild flowers make Manali the perfect retreat for a family holiday.
Manali at an altitude of 1,829 meters, surrounded by towering peaks, is far removed from the hubbub of everyday life. Its proximity to the snowline, the breathtaking landscape, the meandering Beas River, dappled orchards and fairy-tale forests of deodar make Manali an inspirational holiday for you and your loved ones.
Maharaj ji at the meditation camp, in deep trance

FIVE DAY YOGA & MEDITATION PACKAGE:
First Sadhna Shiver 4th June To 7th Jun
Second Sadhna Shiver 9th Jun to 12th Jun
Departure First camp
2nd Jun
Departure second camp
7th Jun
3rd Jun Arrival at Manali . Welcome registration, check - in rooms, snacks and drinks..
Evening Dinner,at
8 PM.
4th June

Morning at
6AM move to Ashram for meditation session, practice of yogic postures and simple pranayama.and sadhna techniques by His Holiness Sudanshu Ji Maharaj.
10 AM to 11AM Breakfast.11AM to 12PM practice and answers to queries
12PM departure for Hotels, 1300 To 1400 Hrs Lunch'
2PM to 3PM Rest.
330PM departure to Ashram for meditation
4PM to 5-30PM meditation techniques
5-30 TO 6-30 PM Practice Techniques.
6--30PM To 7PM Satsangh
7PM Departure for Hotels
8PM Dinner and rest
Devotees practicing meditation

5th June.
Morning at 6AM move to Ashram for meditation session, practice of yogic postures and simple pranayama.and sadhna techniques by His Holiness Sudanshu Ji Maharaj.
10 AM to 11AM Breakfast.11AM to 12PM practice and answers to queries
12PM departure for Hotels, 1300 To 1400 Hrs Lunch'
2PM to 3PM Rest.
330PM departure to Ashram for meditation
4PM to 5-30PM meditation techniques
5-30 TO 6-30 PM Practice Techniques.
6--30PM To 7PM Satsangh
7PM Departure for Hotels
8PM Dinner and rest
Meditation in the Pyramid
6th June
6AM Departure for Rohtang Pass/ and sightseeing Manali.
5PM Arrival , Tea and Dinner will be served at 8PM
7th June
6AM Departure for Ashram for meditation
7To 9-30AM closing ceremony
9-30 TO 10-30 Breakfast
10-30 to 1PM Problem solving session.
I PM To 2PM Lunch
3-30 Departure for Delhi


Accommodation
Accommodation has been arranged on twin sharing in the Hotels located at Naggar which is historical and scenic place.

b) ASHRAM : Ashram -it is a spiritual heaven, resting serenely among the Himalayan mountains and River Beas flowing It is nestled in the lap of the Shivalik range of the
Himalayas. The ashram's location among the apple orchard and aesthetic presentation of pious themes create an atmosphere of true spiritual sublimity.
Transportation
From Delhi Air-conditioned Luxury buses will take you to MANALI.Transport for conveyance from hotels to Ashram and for sightseeing to Rohtang Pass have been arranged


Manali the abode of Devtas most suitable for Meditation
Contact
Shri Lalit
09312284390

Saturday, March 27, 2010

मित्रता होना आसान हे




मित्रता होना आसान हे ,मगर मित्र होना दूसरी बात हे , हमारी मित्रता बहुत लोगों से होसकती हे पर मित्र सब नहीं होते !
गुरुवर सुधांशुजी महाराज के प्रवचनांश


--
Madan Gopal Garga द्वारा GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL-Good thoughts by SUDHANSHUJI Maharaj के लिए 3/27/2010 05:09:00 AM को पोस्ट किया गया

Friday, March 26, 2010

vaani ki dhaar

..


अपनी  वाणी  की  धार को   छुपाने  का प्रयास  वे  करते  हैं ,  जिनका  कुछ  निहित  स्वार्थ  होता  है .
गुरुवर सुधांशुजी महाराज के प्रवचनांश

--
Nidhi Vohra द्वारा ADHYATMIK Good thoughts by Param Pujay SUDHANSHUJI Maharaj के लिए 3/25/2010 08:37:00 PM को पोस्ट किया गया

Tuesday, March 23, 2010

Ramnavmi ke pavan avsar


..


24th March 2010 ko Ramnavmi ke pavan avsar par v.j.m (Delhi) apni 20th anivarsary ki sabhi bhakton ko hardik badhai aur Guruvar ka shubh ashirwad from v.j.m [Delhi]
23 Mar.2010 11.28
from Anil Singh

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Posted By Madan Gopal Garga to ANANDDHAM.ORG established by Param Pujay SUDHANSHUJI Maharaj at 3/23/2010 01:33:00 PM

Tuesday, March 16, 2010

Fw: [ADHYATMIK Good thoughts by Param Pujay SUDHANSHUJI Maharaj] happy new year

----- Original Message ----- To: mggarga@gmail.com
Sent: Tuesday, March 16, 2010 5:25 AM
Subject: [ADHYATMIK Good thoughts by Param Pujay SUDHANSHUJI Maharaj] happy new year



Wish you all a happy new year,

Gudi Padva

and

navratra


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Madan Gopal Garga द्वारा ADHYATMIK Good thoughts by Param Pujay SUDHANSHUJI Maharaj के लिए 3/16/2010 05:20:00 AM को पोस्ट किया गया

Thursday, March 11, 2010

समय की रफ़्तार इतनी तीव्र




"संसार में समय को बहुमूल्य संपदा माना गया है। समय की रफ़्तार इतनी तीव्र है कि पलक झपकते ही आप पिछड़ सकते है। इसलिए अपने जीवन के हर पल को, क्षण को कीमती मानकर उसका सदुपयोग करो। समय को कभी बरबाद मत करना। क्योंकि समय को जो व्यर्थ बिता देते है, समय उनको बरबाद कर देता है।"

परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज

Time is the most valuable treasure in the world. Time is also fleeting and can be gone within the blink of an eye. That is why, consider every moment of life precious and make good use of your time. Do not waste time. Because the one who wastes time is ruined by time.


Translated by Humble devotee
Praveen Verma










यदि किसी को कुछ दे




"यदि किसी को कुछ दे दिया जाए तो उसे सदा गुप्त ही रहने दो। घर में जब कभी कोई आ जाए तो उसका विधिपूर्वक सत्कार करो। यदि किसी का प्रिय कार्य कर दिया है तो उसके सम्बन्ध में मौन रहो और यदि किसी ने तुम्हारा उपकार किया है तो उसे सबके सामने प्रकट करते रहो।"

परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज


If you give something to somebody, let it be a secret forever. When someone comes to your home, welcome him properly. If you do any task which is dear to someone, remain quiet about it. And if someone does something good for you, you must acknowledge that in front of everyone.













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भविष्य जानने की कोशिश मत करो




"भविष्य  जानने की कोशिश मत करो। भविष्य परमात्मा के हाथ में है, वर्तमान आप के हाथ में है। भूतकाल बीत गया, उस की कोई कीमत नहीं । वर्तमान को अच्छा बना रहे है तो
भविष्य की नींव डाल रहे हैं ।"

परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज


Do not try to predict the future. The future is in God's hands.  Only the present is in our hands.  The past has already happened and there is no value in dwelling on it.  If we can better our present then that will be the foundation for a better future.



Translated by Humble Devotee
Praveen Verma


 




मनुष्य की प्रत्येक इन्द्रिय का




"मनुष्य की प्रत्येक इन्द्रिय का अपना धर्म है । उसे अपने धर्म का पालन करना चाहिये ।
आँख का धर्म है समस्त प्राणियों में ईश्वर का दर्शऩ करें । कान का धर्म है महापुरुषों की अमृतवाणी सुनना, दूसरों की अच्छाइयाँ सुनना। मुख का धर्म है सत्य और प्रिय वचन बोलना । हाथों का धर्म है सत्कर्म करना, सेवा धर्म अपनाना। प्रत्येक मनुष्य का धर्म है कि अपने प्रति, परिवार के प्रति, समाज के प्रति, राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को पूरा करें।"

परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज


Every human sensory organ has its own property or attribute. These attributes should exist in all people. The eye's attribute is to see God in all beings and the goodness in people. The ear's attribute is to listen to spiritual teachings of the saints. The mouth's attribute is to speak the truth and to speak sweetly. The hands' attribute is to do good deeds and to serve humanity. It is the duty of every person to utilize the attributes of one's senses towards himself, family, society and the nation.


Translated by Humble Devotee
Praveen Verma








कर्म और भाग्य



कर्म और भाग्य दोनो अलग अलग हें और इनका महत्त्व ही ! कर्मठता पर ध्यान दो और आलस्य को त्यागो ! भाग्यवादी मत् बनो परिश्रम करो !
गुरुवर सुधांशुजी महाराज के प्रवचनांश

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Madan Gopal Garga द्वारा GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL-Good thoughts by SUDHANSHUJI Maharaj के लिए 3/11/2010 05:28:00 AM को पोस्ट किया गया

Sunday, January 10, 2010

Fw: [Param Pujay SUDHANSHUJI Maharaj ki AMRIT VANI] तर्क और प्यार

तर्क और प्यार


तर्क कर लेना भली बात हें पर उसको तकरार में मत् बदल लेना !
जितना त्याग होगा उतना प्यार गहरा होगा ,त्यागी बनो प्यार अपने आप होजाएगा
गुरुवर सुधांशुजी महाराज के प्रवचनांश

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Posted By Madan Gopal Garga to Param Pujay SUDHANSHUJI Maharaj ki AMRIT VANI at 1/10/2010 08:57:00 AM