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See Guruji giving blessings in the end

The prashna & answers are taken from Dharamdoot.




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Monday, August 31, 2009

कमाई

  • जिज्ञासु :- पूज्य गुरुदेव ! हम प्रयास बहुत करते हें लेकिन कमाई में बरकत नहीं है ! धन आता हें और चला जाता है कारण समझ नहीं आता ,कृपया मार्गदर्शन करें ?
  • महाराजश्री :- पुराणों में वर्णन आता है की किन किन कारणों से लक्षमी एक द्वार से आकर दुसरे द्वार से निकल जाती है , पुराण में कहते हैं की जिस घर में कलह कलेश हो ,महिला अपने नयनों से आँसू बहाती रहें और पुरूष अपना रोब दिखाता रहे , घर की अवस्था ठीक न हो , घर से वस्त्र मैले रहें वाणी मैली हो ,और वस्तुएं बिखरी पडी रहें ,बच्चे बड़ों का समान न करें और संसार के मालिक का नाम न लिया जाए ,अपने हाथों से पवित्र सेवा कार्य न होता हो उस घर से लक्षमी का वास नहीं होता ! अपने अधिक परिश्रम से अगर कोई लक्षमी को घर ले भी आए तो वहाँ बरकत नहीं होती

Friday, August 28, 2009

जिज्ञासु : पूज्य गुरुदेव समाज में हर जगह भ्रष्टाचार

  • जिज्ञासु : पूज्य गुरुदेव समाज में हर जगह भ्रष्टाचार देख कर मन दुःखी होता हे ,भ्रष्टाचार कैसे मिटे ? कृपया उपाय बताएं ! 
  • महाराजश्री ! इस समाज में यदि इमानदारी का दान व्यक्ति कराने लग जाएँ इमानदारी का वातावरण चारों ओर फैलजाए तो भ्रष्टाचार मिटेगा ! दुनिया में ऐसे बुरे लोग भी किसी न किसी मान के बेटे हैं ! किसी कुल के वे भी अंग हैं !यदि इनके मन अच्छे हों , पवित्र हों ,समाज का वातावरण एक एक करके एक व्यक्ति सुधारता है तो सब सुधरते हैं , क्योंकि जैसे बूंद बूंद बरसती है तो चारों तरफ नदी बहने लग जाती हैं ! ऐसे ही बूंद बूंद मिलकर to सागर बनता है ! व्यक्ति व्यक्ति से ही तो समाज बनता है ,व्यक्ति व्यक्ति से ही विश्व बनता है ! जिस दिन एक एक व्यक्ति स्वंय अपना जिम्मा ले की मैं अपने आपको सुधार रहा हूँ दुनिया सुधरेगी !उस दिन सारा विश्व सुधरने की स्थि़ति में आ जायेगा !
  • धर्मदूत जुलाई २००९

Thursday, August 27, 2009

जिज्ञासु : पूज्य गुरुदेव ! जीवन में अगर भाग्य

  • जिज्ञासु : पूज्य गुरुदेव ! जीवन में अगर भाग्य की प्रबलता है तो कर्म का क्या महत्त्व ?

  • महाराजश्री : हमारा बहुत सारा जीवन दर्शन इस प्रकार भाग्यवादी हो गया कि लोगों ने दुर्घटनाओं को भी भाग्य मान कर स्वीकार कर लिया ! वहाँ बुधि विवेक और सावधानी के महत्त्व को भुला दिया ! सड़क पर यदि कोई ट्रक से टकराकर मर गया या ट्रक ड्राइवर ने शराब पीकर उसे कुचल दिया तो यही मान लिया गया कि इसकी मृत्यु ऐसे ही लिखी थी ! सोचने की बात है कि यदि ऐसा मान लिया जाए तो फिर क्या आवश्यकता है कि ट्रफिक विभाग बनाने की ! क्या आवश्यकता है किसी भी प्रकार की सावधानी बरतने की ! संसार भर में जो ट्रफिक नियम बने हैं उनके कारण सड़क दुरघटनाओं में मृत्यु दर काफी घटी है ! आंकडों के अनुसार तीन हजार सालों में १५ हजार युद्ध हुए ! उन युद्धों इतने लोग नहीं मारे गए जितने कि मियमों के अभाव में अथवा नियमों को न मानने के कारण दुर्घटनाओं से मारे गए ! इसलिए आज आवश्यकता इस बात की है कि इन अपनी कमजोरियों ,अपनी असावधानियों ,अपनी निष्क्रयता , और अपनी बुद्धिहीनता का दोष अपने भाग्य के माथे न मढ कर स्वयं विचार करें और साहस एवं पराक्रम से परिस्थितियों को अपने अनुकूल बनाने का प्रयास करें !
धर्मदूत जुलाई २००९

Sunday, August 16, 2009

गुरु ज्ञान वाटिका के पुष्प


गुरु ज्ञान वाटिका के पुष्प



"जीवन की सम्पूर्णता है आनन्द और आनन्द परमात्मा का ही एक रूप या एक नाम

है, जिसे सच्चिदानन्द कहा जाता है। हमारा जन्म परमात्मा से मिलने के लिए ही

हुआ है और इसी उद्देश्य को लेकर हम दुनिया में आए है। वस्तुतः जीवन एक

अवसर है परमात्मा से मिलने के लिए।"



परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज




Bliss is the perfection of life and also a form or a name of God which is called "Existence-Consciousness-Bliss."
Our object and purpose of taking this human birth is to unite with the Almighty. In fact life is an opportunity
to come together and unite with the Supreme, the lord who is Omnipresent and all-pervading.

His Holiness Sudhanshuji Maharaj



Humble Devotee
Praveen VErma