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The prashna & answers are taken from Dharamdoot.




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Tuesday, June 9, 2015

हर भक्त की पुकार





हर भक्त की पुकार अपने सद्गुरुजी के लिए एक ही होती है और वह है।
तेरा जलवा जहाँ होगा।
मेरा सजदा वह होगा।
मेरे जैसे तो लाखो होंगे।
पर तेरे जैसा प्यारा कहाँ होगा।

Saturday, June 6, 2015

जिस तरह नदियों



ध्यान रखना जिस तरह नदियों का जल बहकर वापिस लौटता नहीं , जैसे पेड़ों से पत्ते टूटकर बिखर जाँएं तो डाल पर वापिस लगते नहीं, गया हुआ श्वास लौटता नहीं और बी्ता हुआ समय कभी हाथ आता नहीं । जीवन में बहुत कुछ हम पाकर खोते है और बहुत कुछ खोकर पाते भी हैं । समय का चक्र लगातार गतिमान रहता है। हर संयोग के बाद वियोग है और हर वियोग के बाद संयोग है। यह द्वंद्वमय संसार है। इस संसार की रीत को समझते हुए अपने आप को कमज़ोर नहीं होने देना। परमात्मा के नाम का सहारा लेना। जिसने उसकी अँगुली थामी है वो अकेला नहीं, उसे सँभालने वाला उसके साथ है। वो निश्चित रूप से आगे बढेगा और तरक्की होगी। अपना मन कमज़ोर न होने दे।

Friday, June 5, 2015

परमात्मा हमारे लिए






हमने मन को अस्थिर - अस्थायी चीजों में लगा रखा है, हम जीवन की प्राथमिकताओ को पहचानने का प्रयास नहीं करते, परमात्मा हमारे लिए केवल द्वितीय वस्तु है, स्वयं को हम जानते नहीं, अन्दर हम झांकते नहीं, बस यही तो खोट है मन में, स्वयं को जानना है। ध्यान, सत्य को पहचानना ही ध्यान है, उस परम प्रभु से मिलना, उसके लिए बेचैनी, तड़प, उससे मिलने की तीव्र उत्कंठा ही योग है।


Thursday, June 4, 2015

चिता जलने से

http://ammritvanni.blogspot.in/



परम पूज्य सुधांशुजी महाराज


चिता     जलने  से  पहले  ज़ो  सचेत  होकर  प्रभु  का  नाम  जपते  हैं  और  सत्काम   करते  हैं ,वे  भक्ति  के   सीढ़ियों  पर  आसानी   से  चढ़  जाती  हैं .

Monday, June 1, 2015

ध्यान योग की



ध्यान योग की अनूठी अध्यात्मिक राह पर चलने के लिए मनुष्य को तीन कृपाओ की परम आवश्यकता होती है। प्रथम ईश्वरीय कृपा, द्वितीय गुरु कृपा और तृतीय स्वयं की स्वयं पर कृपा।