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See Guruji giving blessings in the end

The prashna & answers are taken from Dharamdoot.




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Friday, January 28, 2011

गुरुदेव ! जीवन में सात्विक भाव जगाने के लिए क्या करना चाहिए?




जिज्ञासु :
गुरुदेव ! जीवन में सात्विक भाव जगाने के लिए क्या करना चाहिए?

पुज्य गुरुदेव !
तरह -तरह के रंगों का अपना महत्व हे ,लेकिन सात्विक्ता के रंग यानी क्रीम का अपना महत्व है ! यदि इसी रंग को पहना जाय ,साथ ही सात्विक भोजन किया जाय और सात्विक लोगोंका संग किया जाय सत्साहित्य पढें ,मन को संसारिकता या भौतिकता की और बहने से रोकें भक्ति में सेवा में मन लगाएं ,वृतियां सात्विक होती चली जायेंगी !

Friday, January 21, 2011

स्वयं को मूल्यवान बनाने और समाज के लिए





जिज्ञासु : गुरुदेव ! स्वयं को मूल्यवान बनाने और समाज के लिए स्वयं को उपयोगी बनाने के लिए हमें
क्या करना चाहिए ?

पुज्य गुरुदेव ! आप सबको परमात्मा ने यह जीवन दिया ! इसमें कलाओं का विकास होना चाहिये ! इस जीवन को कीमती बनायें और कीमती बनाने का तरीका क्या हो सकता हे ! प्राण उर्जा को आदमी ने अपनी ईर्ष्या मे ,रोग में,भोग में जलाया ! जबकी इसका उपयोग आत्म उत्थआन के लिए किया जाना चाहिए ! इसके बाद अगला सोपान आता हे मन की दुनिया का ! मानसिक रूप से हम अपने आपको प्रसन्न रखें , खिला हुआ रखें ! अपना बौद्धिक् विकास करें ! बुद्धि तेज हो , लेकिन प्रेम से और धर्म से जुडी हुई हो ! बिगडी हुई बुद्धी अपना भी विनाश करती हे और समाज का भी विनाश करती हे ! इसलिए बुद्धि को धर्म की शरण में लाना चाहिये !

Wednesday, January 19, 2011

अर्थ के अर्जन में दोश आते हें ऐसे में क्या लरे !



जिज्ञासु : गुरुदेव !
धर्म के पथ पर चलने का सदेश सभी देते हें ,लेकिन जीवन के लिए अर्थ भी जरूरी हे ! अर्थ के अर्जन में दोश आते हें ऐसे में क्या लरे !
पुज्य गुरुदेव !
चार पुरुषार्थ माने गये हें : धर्म ,अर्थ , काम और मोक्ष ! धर्म के सथ ही अर्थ कमाओ और अर्थ के साथ ही कामनायें पूरी करो ! धर्मपूर्वक जीवन यापन करते हुए ससार से मुक्ति प्राप्त कर लो ,मोक्ष प्राप्त कर लो ! यही तो जीने का लक्ष्य हे ! धन अगर धर्मपूर्वक कमाओगे तो फिर अर्थ सुअर्थ बनेगा ! आपको आगे बढायेगा अन्यथा अर्थ का अनर्थ बनेगा ! दु:ख पहुंचेगा ! अपनी कामनायें धर्मपूर्वक पूरी करें तभी आपको शांति मिलेगी ! ये किसी को भी बिखेर सकती हे , भले ही वह कितना भी शक्तिशाली और सक्षम हो ! ये कामनाये आपके जीवन को इस प्रकार उलझा देंगी कि सुबह होगी शाम होगी और जिन्दगी तमाम हो जायेगी , लेकिन ये कामनायें समाप्त नहीं होंगी ! इसलिए धर्मपूर्वक अर्थ प्राप्त करो ! इसी में भलाई हे !

Tuesday, January 18, 2011

पुज्य गुरुदेव हमारे जीवन के लिए सबसे महत्व्पूर्ण क्या हे ?




जिज्ञासु : गुरुदेव ! पुज्य गुरुदेव हमारे जीवन के लिए सबसे महत्व्पूर्ण क्या हे ?

मनोरमा , राम नगर (उत्तरांचल)

पूज्य गुरुदेव :-मनुष्य के गुण उसके जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हें ! समप्ति तो संसार में ही कमाई जातीहेऔर यहीं छूट जाती हे लेकिन गुण तो जन्म जन्मान्तर तक काम आते हें ! आपका स्वच्छ अन्तर्मन निर्मलस्वभाव इस दुनिया में भी आपको सुखी करेगा और अगली दुनिया में भी सुखी करेगा ! आपकी सजी हुई आत्माआपको उच्च सिंहासन पर बैठायेंगी ! आओअका निर्मल हृदय परम प्रभु का आसन बनेगा ! आपक्र मन में उठतीहुईं भावनायेंआपको अपने प्रभु का चिंतन करने के लिये तत्पर करेंगी ! इसलिए दुनिया की कोई भी दौलत इतनीमहत्वपूर्ण नहीं है जितने गुण !

Wednesday, January 12, 2011

अगर हम कामना और आशा को त्याग दें तो जीवन में उन्नति कैसे करेंगे




जिज्ञासु : गुरुदेव ! कहा जाता है कि कोई कामना मत रखो ,आशा मत रखो ! अगर हम कामना और आशा को त्याग दें तो जीवन में उन्नति कैसे करेंगे ? कामना ही तो कार्य करने की प्रेरणा देती है ! कृपया स्पष्ट करें !

विश्वप्रकाश गुप्ता ,रीवा (म प्र)
-पूज्य गुरुदेव :कामनायें जगानी बुरी बात नहीं , आशायें और आकाक्षायें पालना बुरी बात नहीं,क्योंकि व्यक्ति इसी आधार पर उन्नति करता है ! दूसरों को देख कर अन्दर से प्रेरणा आती हे तो ईंसान आगे बढ्ता है ,पुरुशार्थ करता है! आशायें आकाक्षायें हमारे मन में आगे बढने की इच्छा पैदा करती हैं ! आवश्यकता अविष्कार को जन्म देती है ! आविष्कार के माध्यम से मनुष्य तरह -तरह की चीजें प्राप्त करते हैं ! लकिन आप जानते हैं कि कोई भी चीज नियंत्रण में है तो अच्छी है ,नियंत्रण से बाहर गयी तो वही चीज खतरनाक हो जाती है ! अग्नि जब तक आपके नियंत्रण में है , तो उसके द्वारा आप भोजन पकाइये , तरह - तरह के उपक्रम चलाइये ! गाडी के अन्दर भी अग्नि का माध्यम लेकर मनुष्य उसे संचालित करता है ! अग्नि के सहारे ही मनुष्य पेट भर रहा है ! सब कुछ ठीक है , लेकिन ऐक छोटी सी चिनगारी थोड़ी सी अनियत्रित होकर विशाल रूप धारण कर ले तो फिर उस अग्नि को हितकारीमत मानना ! वह विनाशकारी हो जायेगी ! घी का उपयोग करते हुए लोग अपनी सेहत बनाते हैं , लेकिन नियंत्रणा न कर अधिक मात्रा में इसका सेवन करें तो घी भी विष हो जायेगा ! अगर मर्यादा से हटकर बिना माप-तोल के आप अमृत लेंगे तो अमृत भी विष का काम करेगा ! आशा,आकांक्षा मन में पालना अच्छी बात है , लेकिन उन पर बुधि का नियंत्रण होना बहुत जरूरी है !

Saturday, January 8, 2011

वह इंसान महान है , जो अपने निय



[http://ananddhamm.blogspot.com/2011/01/blog-post_9891.html?spref=bl]
ANAND DHAMM Established by Param Pujay SUDHANSHUJI Maharaj: अपने नियम: "वह इंसान महान है , जो अपने नियम और मर्यादा में हमेशा खरा उतरता है ! जिसके सोने का अपना नियम , जागनेका अपना नियम ,भोजन का अपना नियम ,काम कर..."

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Posted By Madan Gopal Garga to Anand Dham Mumbai Maharashtra at 1/08/2011 11:01:00 AM