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Friday, January 16, 2009

गुरु वाणी

----- Original Message -----
From: mggarga
To: mggarga
Sent: Thursday, January 15, 2009 5:02 AM
Subject: Fw: [GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL] गुरु वाणी



----- Original Message ----- To: mggarga@gmail.com
Sent: Thursday, January 15, 2009 4:58 AM
Subject: [GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL] गुरु वाणी



  • पुण्य नहीं कमा सकते तो घर में पाप लेकर मत आओ ! जिस घर में पुण्य की कमाई आये ,वहाँ से स्वर्ग की खुशबू आया करती है ! सारी शक्तियां घर में आ जायेंगी और जीवन में कोई कमी नहीं रहेगी !
    पूज्य सुधांशुजी महाराज

    शान्ति के समान कोई तप नहीं हे !
    संतोष से बढ्कर कोई सुख नहीं हे !
    तृष्णा से बढकर कोई व्याधि नहीं हे !
    दया के समान कोई धर्म नहीं हे !
    सत्य जीवन हे और असत्य मृत्यु हे !
    घृणा करनी हे तो अपने दोषों से करो !
    लोभ करना हे तो प्रभू के स्मरण का करो !
    बैर करना हे तो अपने दुराचारों से करो !
    दूर रहना हे तो बुरे संग से रहो !
    मोह करना हो तो परमात्मा से करो !
    पुज्य सुधान्शुजी महाराज


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Posted By Madan Gopal Garga to GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL at 1/15/2009 04:53:00 AM

कर्म

----- Original Message -----
From: mggarga
To: mggarga
Sent: Friday, January 16, 2009 7:14 AM
Subject: Fw: [GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL] 1/15/2009 07:17:00 PM



----- Original Message ----- To: mggarga@gmail.com
Sent: Thursday, January 15, 2009 7:18 PM
Subject: [GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL] 1/15/2009 07:17:00 PM


  • कर्म करने का काम मनुश्य का हे और फल देना भगवान का काम हे !
    कैसी भी हालत हो घबराना नहीं ,हिम्मत रखना कभी न कभी तो भाग्य खुलेगा !
    अगर आदमी कर्म करे तो दुर्भाग्य भी भाग जायेगा !
    गुरु है तो जिन्दगी शुरु है !
    पूज्य सुधांशुजी महाराज
    १-११-०८ के टी वी प्रवचन से


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Posted By Madan Gopal Garga to GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL at 1/15/2009 07:17:00 PM

विचार्नियें










Subject: [GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL] विचार्नियें




  • एकता जब आती हे , जब सब अपनी अपनी अकड छोड कर झुकना जान जाएं , नहीं तो विघटन रहता हे !
  • घमंड भरी आंखें, गलत गवही देने वाली जीभ , दुख देने वाले हाथ ,गलत रासते पर चलने वाले पैर भगवान को पसंद नहीं हें !
  • पूज्य सुधांशुजी महाराज
  • ३१-१०-०८ के टी वी प्रवचन से


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Posted By Madan Gopal Garga to GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL at 1/12/2009 06:45:00 PM

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Posted By Madan Gopal Garga to ADHYATMIK at 1/13/2009 04:51:00 AM

अमृत वाणी

----- Original Message -----
From: mggarga
To: suvichar ; ammritvanni ; adhyatmik
Sent: Friday, January 16, 2009 10:55 AM
Subject: Fw: [GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL] अमृत वाणी



----- Original Message ----- To: mggarga@gmail.com
Sent: Tuesday, January 13, 2009 7:22 PM
Subject: [GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL] अमृत वाणी


  • घमंड भरी आंखें ,गलत गवाही देने वाली जीभ , दुख देने वाले हाथ ,गलत रासते पर चलने वाले पैर , भग्वान को पसंद नहीं हैं !
  • किसि को भी अपनी फूट का फायेदा मत ऊठाने दो !
  • शांत ईंसान ,प्रेम से भरे ईंसान ,दया से भरे ईंसान के पास अगर शक्ति होगी तो भला होगा !
  • पूज्य सुधांशुज महाराज
  • ३१ -१०-०८ के टी वी प्रवचन से


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Posted By Madan Gopal Garga to GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL at 1/13/2009 07:16:00 PM

Sunday, June 1, 2008

जिज्ञासा और उत्सुकता

जिज्ञासा आत्मचिन्तन ,आत्म्विशलेषण और आत्मशोधन की प्रक्रिया है !

उत्सुकता लगभग सभी इंसानों के मन में उठती है , किंतु जिज्ञासा का अंकुर किसी सात्विक मन में ही प्र्स्फुँटित होता है !उत्सुकता का सम्बन्ध सांसारिक वस्तुओं या घटनाओं से है , जबकि जिज्ञासा का सम्बन्ध आध्यात्म से है ,आत्मा से है !उत्सुकता कई रूप धारण कर लेती है ,जैसे हैरानी ,बेचैनी ,घबराहट ,उलझन और कई बार तो क्रोध का रूप भी धारण कर लेती है !

जिज्ञासा सत्य की तलाश है ,संतोष की प्राप्ति है ,आनंद की अनुभूती है और परमपुरुष के दर्शन करने की उत्कंठा है ! जिज्ञासा यात्रा है परमपद को पाने की, इसीलिए जीवन का भाव अत्यन्त कल्याणकारी है !


Sunday, October 28, 2007

गणपताय नम:




श्री गणेशाय नम: ॐ गंग गणपताय नम: