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See Guruji giving blessings in the end

The prashna & answers are taken from Dharamdoot.




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Wednesday, February 23, 2011

अपनी संतान को धन नहीं उत्तम गुण दीजिए

जिज्ञासु : पुज्य गुरुदेव ! मेरी उम्र पचपन साल से ऊपर हो चुकी है ! अभी तक बच्चों के लिए न तो ठीक से कुछ बचत कर पाया हूं और न ही घर आदि बनवा सका हूं ! सारा पैसा तो उनकी पढाई में ही खर्च हो जाता है ! पत्नी कहती है कि तुमने बच्चों के लिए किया ही क्या है ? ऐसे में मुझे स्वंय पर ग्लानि होती है ! कृपया मर्गदर्शन करें !

महारा्जश्री :अपनी संतान को धन नहीं उत्तम गुण दीजिए ! सन्तान को सुखी बनाने के लिए संग्रह करने वाला पिता हितकर नहीं होता ,उनको संग्रह नहीं संस्कार देने चाहिए ! आपकी सन्तान अच्छे संस्कारों से युक्त होगी तो आपके घर में सुख समृद्धि ही नहीं स्वर्ग का वातावरण होगा ! अपनी संतान को ऐसा योग्य बना दो कि तुम से भी बढकर योग्य बन सके !
"पूत सपूत तो क्यों धन संचय , पूत कपूत तो क्यों धन सचय "
अगर बेटा सपूत है तो उसके लिए धन जोडने की जरूरत ही नहीं,क्यों कि वह लायक बेटा स्वयं ही इतना कमा लेगा कि उसे आपकी कमाई की जरूरत ही नहीं होगी ! अगर बेटा कपूत हे तो उसके लिए पैसा इकठा नहीं करना चाहिए अगर कर लोगे तो वह दौलत बरबाद कर देगा !बेहिसाब पैसे से सन्तान का पतन शुरु हो जाता नै ! सन्तान को लेकर गलत कमाई से बचिए !सबसे बडी दौलत आपकी सन्तान है !

Sunday, February 6, 2011

मन से अशान्ति नहीं जाती


जिज्ञासु : पुज्य गुरुदेव ! बार -बार प्रयास करने पर भी मन से अशान्ति नहीं जाती ! एक व्याकुलता,एक बेचैनी बनी ही रहती है ! कृपया कोई उपाय बतायें जिससे मैं शान्तिपूर्वक अपने कार्य और भगवान की भक्ति कर सकूँ !

महाराजश्री : जब तक इंसान बच्चों जैसा भोलापन अपने अंदर रखता है , उसके अंदर अशांति नहीं रहती ! जैसे -जैसे माया की परत व्यक्ति के ऊपर बढती जायेगी , वैसे-वैसे मन अशांत होगा ! मनुष्य जितना कृत्रिम है ,बनावटी है ,दिखाने वाला है उतना ही अशांत है और जितना सरल ,सहज ,प्रेमपूर्ण है उतना ही वह शांत एवं आनदित है ! दुनिया में कोई अशांत होना नहीं चाहता लकिन कार्य अशांति के करता है ! अशांति वाले कार्य करके शान्ति कैसे संभव होगी ! आसक्ति रहित होकर कर्तव्य की भावना से सहज सरल होकर कार्य कीजिए शांति अवश्य अंदर आयेगी !

Friday, January 28, 2011

गुरुदेव ! जीवन में सात्विक भाव जगाने के लिए क्या करना चाहिए?




जिज्ञासु :
गुरुदेव ! जीवन में सात्विक भाव जगाने के लिए क्या करना चाहिए?

पुज्य गुरुदेव !
तरह -तरह के रंगों का अपना महत्व हे ,लेकिन सात्विक्ता के रंग यानी क्रीम का अपना महत्व है ! यदि इसी रंग को पहना जाय ,साथ ही सात्विक भोजन किया जाय और सात्विक लोगोंका संग किया जाय सत्साहित्य पढें ,मन को संसारिकता या भौतिकता की और बहने से रोकें भक्ति में सेवा में मन लगाएं ,वृतियां सात्विक होती चली जायेंगी !

Friday, January 21, 2011

स्वयं को मूल्यवान बनाने और समाज के लिए





जिज्ञासु : गुरुदेव ! स्वयं को मूल्यवान बनाने और समाज के लिए स्वयं को उपयोगी बनाने के लिए हमें
क्या करना चाहिए ?

पुज्य गुरुदेव ! आप सबको परमात्मा ने यह जीवन दिया ! इसमें कलाओं का विकास होना चाहिये ! इस जीवन को कीमती बनायें और कीमती बनाने का तरीका क्या हो सकता हे ! प्राण उर्जा को आदमी ने अपनी ईर्ष्या मे ,रोग में,भोग में जलाया ! जबकी इसका उपयोग आत्म उत्थआन के लिए किया जाना चाहिए ! इसके बाद अगला सोपान आता हे मन की दुनिया का ! मानसिक रूप से हम अपने आपको प्रसन्न रखें , खिला हुआ रखें ! अपना बौद्धिक् विकास करें ! बुद्धि तेज हो , लेकिन प्रेम से और धर्म से जुडी हुई हो ! बिगडी हुई बुद्धी अपना भी विनाश करती हे और समाज का भी विनाश करती हे ! इसलिए बुद्धि को धर्म की शरण में लाना चाहिये !

Wednesday, January 19, 2011

अर्थ के अर्जन में दोश आते हें ऐसे में क्या लरे !



जिज्ञासु : गुरुदेव !
धर्म के पथ पर चलने का सदेश सभी देते हें ,लेकिन जीवन के लिए अर्थ भी जरूरी हे ! अर्थ के अर्जन में दोश आते हें ऐसे में क्या लरे !
पुज्य गुरुदेव !
चार पुरुषार्थ माने गये हें : धर्म ,अर्थ , काम और मोक्ष ! धर्म के सथ ही अर्थ कमाओ और अर्थ के साथ ही कामनायें पूरी करो ! धर्मपूर्वक जीवन यापन करते हुए ससार से मुक्ति प्राप्त कर लो ,मोक्ष प्राप्त कर लो ! यही तो जीने का लक्ष्य हे ! धन अगर धर्मपूर्वक कमाओगे तो फिर अर्थ सुअर्थ बनेगा ! आपको आगे बढायेगा अन्यथा अर्थ का अनर्थ बनेगा ! दु:ख पहुंचेगा ! अपनी कामनायें धर्मपूर्वक पूरी करें तभी आपको शांति मिलेगी ! ये किसी को भी बिखेर सकती हे , भले ही वह कितना भी शक्तिशाली और सक्षम हो ! ये कामनाये आपके जीवन को इस प्रकार उलझा देंगी कि सुबह होगी शाम होगी और जिन्दगी तमाम हो जायेगी , लेकिन ये कामनायें समाप्त नहीं होंगी ! इसलिए धर्मपूर्वक अर्थ प्राप्त करो ! इसी में भलाई हे !

Tuesday, January 18, 2011

पुज्य गुरुदेव हमारे जीवन के लिए सबसे महत्व्पूर्ण क्या हे ?




जिज्ञासु : गुरुदेव ! पुज्य गुरुदेव हमारे जीवन के लिए सबसे महत्व्पूर्ण क्या हे ?

मनोरमा , राम नगर (उत्तरांचल)

पूज्य गुरुदेव :-मनुष्य के गुण उसके जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हें ! समप्ति तो संसार में ही कमाई जातीहेऔर यहीं छूट जाती हे लेकिन गुण तो जन्म जन्मान्तर तक काम आते हें ! आपका स्वच्छ अन्तर्मन निर्मलस्वभाव इस दुनिया में भी आपको सुखी करेगा और अगली दुनिया में भी सुखी करेगा ! आपकी सजी हुई आत्माआपको उच्च सिंहासन पर बैठायेंगी ! आओअका निर्मल हृदय परम प्रभु का आसन बनेगा ! आपक्र मन में उठतीहुईं भावनायेंआपको अपने प्रभु का चिंतन करने के लिये तत्पर करेंगी ! इसलिए दुनिया की कोई भी दौलत इतनीमहत्वपूर्ण नहीं है जितने गुण !