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See Guruji giving blessings in the end

The prashna & answers are taken from Dharamdoot.




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Saturday, May 28, 2011

जिज्ञासु में बच्चों के लिए समय नहीं दे पाता

जिज्ञासु :-पूज्य गुरुदेव में एक मध्यम वर्गीय व्यवसायी हूँ ! प्रतिदिन सुबह से शाम तक परिवार की आवश्यकताओं एवं सुख सुविधाओं के लिए धनार्जन हेतु व्यवसाय मैं लगा रहता हूँ ! ऐसे में बच्चों के लिए समय नहीं दे पाता ,पत्नी ठीक से बच्चों को अनुशासन मैं रख नहीं पाती  ऐसे में बच्चों के बिगड़ने की संभावना भी हो सकती है ! कृपया मेरा मार्गदर्शन करें !
महाराजश्री :- जितनी महानत आप संपत्ति बटोरने में और संपत्ति संभालने में लगाते हैं उससे कई गुना अधिल महानत आपको अपनी सन्तान संभालने मैं लगानी चाहिए ! जिसकी सन्तान संभल गई तो समझ लीजिए की उसकी लोक-परलोक की संपत्ति संभल गई और जिसकी सन्तान बिगड़ गई तो उसके लिए सब कुछ बिगड़ गया , इसलिए सन्तान में मर्यादा और सात्विकता लाना बहुत जरुरी है !

Sunday, May 22, 2011

मानसिक अशांति का आधार क्या हे

पूज्य गुरूदेव ! मानसिक अशांति का आधार क्या हे ? 
महाराजश्री :  जब तक इंसान बच्चों जैसा भोलापन अपने अंदर रखता है उसके अंदर अशांति नहीं रहती  !
जैसे -जैसे माया की परत व्यक्ति के ऊपर चढती जाएगी वैसे-वैसे अशांत होगा ! इसलिए कहा गया है की मनुष्य का व्यवहार जितना कृत्रिम है ,बनावटी है ,दिखावे वाला है ,उतना अशांत है और जितना सरल ,सहज ,प्रेमपूर्ण ,रसपूर्ण है उतना ही वह शांत और आनंदित है !

Sunday, April 24, 2011

पुज्य गुरुदेव !ब्रह्मज्ञान क़ा मार्ग क्या हे ?

जिज्ञासु  :  पुज्य गुरुदेव !ब्रह्मज्ञान  क़ा मार्ग क्या हे ?
 महाराजश्री :-गुरु के प्रति श्रद्धा हे ,माता पिता के प्रति श्रद्धा हे ,अपने धर्म  के प्रति श्रद्धा हे , उसे और दृढ़ करते चले  जाओ ! यदि आप ऐसा करेंगे तो आप आगे बढ़ सकते हैं ! ब्रह्म ज्ञान क़ा मार्ग यही है ! भक्ति की तरफ चलने क़ा मार्ग यही है कि अपनी श्रद्धा को गहरा करो समर्पण के भाव जगाओ !


Wednesday, April 20, 2011

जिज्ञासु :- पूज्य गुरूदेव ! कहते है की कर्मबंधन के

जिज्ञासु :- पूज्य गुरूदेव ! कहते है की कर्मबंधन के कारण संसार में जन्म लेना पड़ता है ! यदि यह सच है तो क्या कर्म हम बंधन में बंधने के लिए कर्म करते है !
महाराजश्री :-सारे शास्त्र कहते है की कर्म बंधन के कारण है ! जब आप कर्म करते है तो बंधन के जाल में बंध जाते हें !भगवान कृष्ण ने संसार को एक ओर विज्ञान दिया ! उन्होंने कहा की कर्म बंधन का कारण नहीं बल्कि आसक्ति बंधन का कारण हें ! यदि किसी कर्म में आसक्ति हो गई तो वह बंधन का कारण बनेगी ! इसीलिए कहते है की कर्म करो लकिन निष्काम भाव से करो ! कर्म करते हुए फल की इच्छा न करो !

Monday, March 21, 2011

जिज्ञासु :- पूज्य गुरुदेव ! क्रोध व्यक्ति के लिए बाधक




जिज्ञासु :- पूज्य गुरुदेव ! क्रोध व्यक्ति के लिए बाधक होता हे , परन्तु हमारे कुछ ऋषी मुनि जैसे कि विश्वामित्र ही क्रोध को नहीं छोड़ पाए फिर भी उनकी भक्ति चरम तक पहुँची ! प्रार्थना है कि मेरी इस जिज्ञासा क़ा समाधान करने की कृपा करें कि यदि क्रोध मात्र एक दोष नहीं छुटता तो धी भक्ति सफल हो सकती है !

महाराजश्री :-ऐसा नहीं है कि क्रोधी व्यक्ति भक्ति नहीं कर सकता , अथवा उसकी भक्ति सफल नहीं होती , वह भक्ति भी कर सकता है , उसकी भक्ति सफल भी हो सकती है लेकिन भक्ति द्वारा वह हो दिव्य शक्ति उपार्जित करता है वह क्रोध के कारण क्षीण हो जाती है ! विश्वामित्र के साथ भी ऐसा ही हुआ ! वे तपस्या के द्वारा जो पुण्य , जो शक्ति उपार्जित करते थे वह उनके क्रोध करने से नष्ट हो जाती थी ~ और उनकी वर्षों की तपस्या व्यर्थ हो जाती थी ! इसीलिए बहुत चाहने पर भे वे ब्रह्मर्षि पद को तब तक न पा सके जब तक उनहोंने अपने क्रोध पर पुरी तरह विजय प्राप्त न कर ली और उनकी भक्ति सफल तभी हुई जब वे क्रोध से रहित हो गए !

Wednesday, March 9, 2011

मन को अच्छे मार...





मन को अच्छे मार्ग पर चलाने के लिये चार सीढ़ियॉ हैं ! 1-सत्य का स्वीकार ! 2-संसार में उपरामता ! 3-आचरण की पवित्रता तथा उच्चता ! 4-पापों के लिये भगवान से क्षमा प्रार्थना !


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Posted By Madan Gopal Garga to AMRIT VANI Good thoughts by Param Pujay SUDHANSHUJI Maharaj at 2/23/2011 10:29:00 PM